Salo Or The 120 Days Of Sodom Movie In Hindi
यदि आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं, तो इसे इसके मूल इतालवी (Italian) ऑडियो और अंग्रेजी या हिंदी सबटाइटल (English/Hindi Subtitles) के साथ देखना ही एकमात्र कानूनी और सही तरीका है। इंटरनेट पर कुछ अनौपचारिक (Unofficial) या फैन-मेड सबटाइटल मिल सकते हैं, लेकिन इसकी मूल भाषा में देखना ही इसके कलात्मक महत्व को समझने का सबसे अच्छा तरीका है।
फिल्म के पीछे का गहरा संदेश (Hidden Meaning & Themes)
For an audience familiar with the history of authoritarianism, the film serves as a visceral metaphor for the . The four "Libertines"—The Duke, The Bishop, The Magistrate, and The President—represent the pillars of society: royalty, religion, law, and executive power. By showing these figures engaging in horrific acts of torture and sexual degradation, Pasolini argues that absolute power inevitably leads to the total dehumanization of the "other." The "Cycles" of Transgression
फिल्म की कहानी और पृष्ठभूमि (The Plot) salo or the 120 days of sodom movie in hindi
फिल्म का परिचय और पृष्ठभूमि (Introduction and Background)
बैन (Bans) फिल्म को इटली, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके, आयरलैंड, फिनलैंड और भारत सहित लगभग 100 से 150 देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया था। कई स्रोतों के अनुसार 50 से अधिक देशों ने इसे बैन किया। ऑस्ट्रेलिया में इसे 1993 में अनबैन किया गया, लेकिन 1998 में दोबारा बैन कर दिया गया। ब्रिटेन में इसे 2000 तक प्रदर्शित नहीं किया जा सका। निर्देशक की हत्या (Director's Murder) फिल्म की रिलीज के कुछ ही समय बाद, 2 नवंबर 1975 को, पासोलिनी की ओस्टिया (Ostia) नामक जगह पर बेरहमी से हत्या कर दी गई। उनके शरीर को बुरी तरह पीटा गया और फिर कार से कुचल दिया गया था। हालांकि एक युवा पुरुष वेश्या को इसका दोषी ठहराया गया, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह हत्या राजनीतिक थी और फिल्म के विवादास्पद संदेश के कारण हुई थी। निर्देशक की हत्या की रहस्यमयी परिस्थितियों ने "सालो" की कुख्याति को और भी बढ़ा दिया। भारत पर प्रभाव (Impact in India) जब भारत में यह फिल्म पहुंची, तो सेंसर बोर्ड ने इसे तुरंत प्रतिबंधित कर दिया। भारत में भी इस फिल्म को बेहद आपत्तिजनक माना गया। हालांकि अब इस फिल्म को प्रतिबंधित सूची से हटा दिया गया है और कानूनी तौर पर इसे कुछ प्लेटफार्म पर देखा जा सकता है, लेकिन सरकार ने इसके प्रदर्शन और वितरण पर सख्त नियंत्रण लागू कर रखा है। आम भारतीय दर्शकों के लिए यह फिल्म अब भी एक जिज्ञासा का विषय है, लेकिन इसके भयावह दृश्यों के कारण इसके बारे में जानकारी लेना ही एक बड़ी चुनौती है।
फिल्म की कहानी और संरचना 1970 का दशक
It is a political art horror film exploring themes of fascism, power, nihilism, and the corruption of institutions. Availability in India
कहानी चार शक्तिशाली और भ्रष्ट इतालवी रईसों के इर्द-गिर्द घूमती है: एक राष्ट्रपति, एक मजिस्ट्रेट, एक बिशप और एक ड्यूक। ये चारों फासिस्ट नेता 16 युवा लड़के और लड़कियों का अपहरण करते हैं और उन्हें एक सुनसान महल में कैद कर देते हैं। 120 दिनों तक, ये चार रईस अपनी मानसिक और शारीरिक विकृतियों को पूरा करने के लिए इन युवाओं पर अमानवीय अत्याचार, यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न करते हैं। फिल्म को चार हिस्सों में बांटा गया है, जो दांते की इन्फर्नो (नरक की यात्रा) से प्रेरित हैं:
फिल्म में ऐसे दृश्य हैं जो मानव गरिमा को तार-तार करते हैं, विशेष रूप से 'Circle of Shit' वाले हिस्से में। 2 नवंबर 1975 को
Salò, or the 120 Days of Sodom (इतालवी: Salò o le 120 giornate di Sodoma ) 1975 की एक फ्रेंच-इतालवी आर्ट-हॉरर ड्रामा फिल्म है। इसके निर्देशक पिएर पाओलो पाज़ोलिनी (Pier Paolo Pasolini) थे। यह फिल्म फ्रेंच लेखक मार्किस डी साद (Marquis de Sade) के 18वीं सदी के उपन्यास The 120 Days of Sodom पर आधारित है।
उपभोक्तावादी समाज की आलोचना (Critique of Consumerism) पासोलिनी के लिए, 1970 का दशक, उपभोक्तावाद की एक नई तानाशाही थी। वह यह दिखाना चाहते थे कि जिस तरह फासीवाद लोगों के शरीर को अपने अधीन कर लेता है, उसी तरह से आधुनिक उपभोक्तावादी समाज लोगों की इच्छाओं, शरीर और पहचान को अपने कब्जे में ले रहा है। उनके लिए नव-पूंजीवादी (Neo-capitalist) इटली की सेक्सुअल रिवोल्यूशन भी एक झूठ थी, क्योंकि वह भी एक "सामाजिक दायित्व" बन गई थी, न कि विद्रोह का कोई रास्ता।
Salò (1975) की कहानी (Movie Storyline in Hindi)
यदि कोई भारतीय दर्शक इस फिल्म को देखना चाहता है, तो उसे यह फिल्म इसके मूल इतालवी (Italian) रूप में ही अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ देखनी होगी। इंटरनेट पर कुछ अनौपचारिक (Third-party) वेबसाइट्स या टोरेंट प्लेटफॉर्म्स पर प्रशंसकों द्वारा बनाए गए हिंदी सबटाइटल्स मिल सकते हैं, लेकिन पायरेसी और सुरक्षा कारणों से हम ऐसे स्रोतों की अनुशंसा नहीं करते हैं।